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*आज का विचार Thought of day*

Hii friends मैं Kartik Sharma आज आप सभी को बताऊंगा कि आप कितने भी थके हो कभी भी हार नहीं माननी चाहिए और जब कभी आपको लगे कि अब आप कुछ नहीं कर सकते ।

तो उस समय बस आप वही करते रहीये जो आप कर रहे हैं ज्यादा कुछ मत करिये क्योंकि

जो आप कर रहे होते हैं वो अाप का सबसे अधिक होता है ।

और वही आपकी सफलता तक पहुंचाती है।

आप को एक कहानी के द्वारा ये बात समझता हूं
कहानी कुछ इस प्रकार है।

जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी, कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी। उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिये।
.
वहां पहुँचते  ही उसे प्रसव पीडा शुरू हो गयी।
उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे और बिजली कडकने लगी।

उसने दाये देखा, तो एक शिकारी तीर का निशाना, उस की तरफ साध रहा था। घबराकर वह दाहिने मुडी, तो वहां एक भूखा शेर, झपटने को तैयार बैठा था। सामने सूखी घास आग पकड चुकी थी और पीछे मुडी, तो नदी में जल बहुत था।

मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीडा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पायेगी ? क्या शावक जीवित रहेगा ?

क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी ? क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पायेगी ?क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ?
वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ?

हिरनी अपने आप को शून्य में छोड, अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी। कुदरत का कारिष्मा देखिये। बिजली चमकी और तीर छोडते हुए, शिकारी की आँखे चौंधिया गयी। उसका तीर हिरनी के पास से गुजरते, शेर की आँख में जा लगा,शेर दहाडता हुआ इधर उधर भागने लगा।और शिकारी, शेर को घायल ज़ानकर भाग गया। घनघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी। हिरनी ने शावक को जन्म दिया।

*हमारे जीवन में भी कभी कभी कुछ क्षण ऐसे आते है, जब हम चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं और कोई निर्णय नहीं ले पाते। तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।अन्तत: यश, अपयश ,हार ,जीत, जीवन,मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है।हमें उस पर विश्वास कर उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए।*

कुछ लोग हमारी *सराहना* करेंगे,
कुछ लोग हमारी *आलोचना* करेंगे।

दोनों ही मामलों में हम *फायदे* में हैं,

एक हमें *प्रेरित* करेगा और
दूसरा हमारे भीतर *सुधार* लाएगा।।

       *अच्छा सोचें*
                🙏

और अपनी सोच अच्छी रखे।

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Thanks Divya ji
Thanks inder ji
Thanks Gyanendra ji
Thanks Khushboo ji

Blog owner
Kartik Sharma
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Mercy the poem

Hii friends i am kartik sharma Today i told you about mercy from a poem Mercy this poem written by William Shakespeare William Shakespeare was a great English poet About the poet : William Shakespeare was born on April 23, 1564 at Stratford- on-Avon in the country of Warwickshire, central England. His father name was John Shakespeare he was a prosperous businessman In age of 13 in 1582 he married Anne Hathaway, a girl senior to him by eight years. He had one son and two daughters He died in 1616 on the anniversary of his birthday in the place of his birth He wrote thirty seven plays. His non- dramatic poetry comprises Venus and adonis, The Rape of Lucrece , Sonnets, (it includes 154 sonnets in number) . POEM The quality of mercy is not strain'd, It droppeth as the gentle rain from heaven Upon the place beneath: it is twice blessed ; It blesseth him that gives and him that takes : It is mightiest in the mightiest it becomes The throned monarch better than his ...